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||श्री गणेशाय नम:||

सूर्यवंश लबाना राजपूत जाति की वंशावली

त्रेता युग में राजा दशरथ के रामचंद्र पुत्र हुए रामचंद्र के दो पुत्र लव एवं कुश वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में पैदा हुए | एवं उनकी शिक्षा वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में रह कर संपन्न हुई किंतु लव एवं कुश को अपने पिता कौनहै यह जानकारी नही थी| जब रामचंद्र ने अश्व मेघ यग्य किया अश्व मेघ यग्य का घोड़ा जहाँ भी जाता है वहाँ तक उस राजा का राज्य माना जाता है लेकिन लव एवं कुश ने घोड़ा देखा तो उसे पकड़ लिया गया  घोड़ा पकड़ने के बाद दोनो मे आमने सामने युद्ध हुआ | युद्ध में सिताजी को पता चला की घोड़ा रामचंद्र का है एवं लव कुश को समझाया कि रामचंद्र आपके पिताजी है तब रामचंद्रजी  को यह पता चला कि ये मेरे पुत्र है और इन्होने मेरे सामने हथियार उठाए है इसलिए इन्हे मे मनसा श्राप देता हूँ लवजी ने अयोध्या  से जाकर लोहगड़ को राजधानी बनाया वहाँ उन्होने पिताजी के प्राश्चित को दूर करने के लिए  यग्य करने की तैयारी की यग्य  में ब्राह्मणो को बुलाया लेकिन ब्राह्मणो ने यग्य करने से इनकार कर दिया क्योकि अपने पिता के सामने हथियार उठाए है |  लावजी ने ब्राह्मणो के बच्चो को बुलाकर स्वयं मंत्र पड़ते हुए ब्राह्मणो के बच्चो से आहुति  दिलाकर यग्य  संपन्न कराया| यग्य के पश्चात लवजी ने ब्राह्मन बेटे बोले आपने हमारा धर्म भ्रष्ट कर दिया है अब हम यग्य में मरना चाहते हैं क्योंकि हमे  ब्राह्मन जाति स्वीकार नही करेगी तब आकाशवाणी हुई कि हे ब्राह्मन पुत्रो मरो मत मरने से आत्महत्या का पाप लगेगा | और आप अपने जीव से जाओगे| भगवान शिव ने स्वप्न देकरमाणिक मोती के भंडार खोल दिए|उन्हे देखकर उनका मन ललचाया तब  राजा लव ने कहा में तुम्हारी शिवगड़ से जनोई करवाउँगा |
केशरिया वाना एवमपगड़ी रंगवाउन्गा तब ब्राह्मन्लादके बोले हमारी जेनोइ सफेद होती है तब राजा लव ने सवा हाथ पगड़ी केसरिया रंग से रंगकर यग्योपवीत की तैयारी की तब ब्राह्मन लड़के बोले हमे कोई पूछेगा की तुम कौन सी जाती के होतो हम क्या कहेंगे|  तब राजा लव ने कहा की में तुम्हे  लोहगद का राज्य दूँगा तथा  तुम्हारी जाती लबाना कहलाएगी सूर्यवंशी कहलाओगे और अयोध्या पूर्वज कहलाएगा सूर्यवंश की
 मारधणिक शाखा लुकति नदी, पांचरांगी ध्वजा ,रंजीत नगारो, कोलियो ढोल ,पॉंच परवर जिनका नाम आहिस्त ईश्व धवल अश्व और अंगीकार फिर जनोई मे इन्हे बिठाया पलाश की हरी लकड़ी एवं भोजन सफेद कपड़ो मे बँधे गये और उन्हे दौड़ाया गया उस समय उनके मामा मौजूद नही थे| काका कुश काशी मे निवास करते थे | लड़के काशी की ओर दौड़ते चले गये काशी पड़ते जाते समय रास्ते मे श्रगी ऋषि के आश्रम से बारह लड़कियाँ अपने घर जा रही थी| 

लड़को को दौड़ कर आते देख कर लड़कियाँ भी दौड़ कर आश्रम मे आ गई| लड़कों को देख कर श्रिग ऋषि बोले आप कौन हो जो लड़कियों के  पीछे दौड़ रहे हो| तब लड़के बोले हम ब्राह्मण लड़के है लोहगढ़ से आ रहे है लव जी महाराज ने हमे लबाना जाती दी है | हमारे काका कुश जी काशी मे है वहा हम पढ़ने जा रहे है | बगीचे मे बावाडी देखकर पानी पीने रुक गये हम इन लड़कियो के पिच्चे नही पड़े है | तब श्रुगि ऋषि बोले आश्रम पर जाकर क्या बचो तुम्हारी शादी हो चुकी हे तब लड़के बोले महाराज हमारी जनोई दी हुई हे हमारी शादी नही हुई है |
श्रीगी ऋषि बोले क्या मई इन कन्याओ से तुम्हारा विवाह करवा दू  तब लड़के बोले तुम्हारी इच्छा हो तो कर दो संबंध हेतु लड़कियो के माता पिता को बुलवाया गया सभी जाजम मे बैठ गये कैशर कस्तूरी के रीति रिवाज से सगाई कर दी गयी और उन्हे तेरह दिन रुकने को कहा | ये बारह भाई बोले हम कैसे भरोसा करे तब श्रीगी ऋषि ने कहा मे तुम्हे पूरा भरोसा दूँगा | तब सब अपने अपने आसन पर बैठ गये और संबंध की सामग्री ली गयी   ११ रुपये  ११ सुपारी ११ हल्दी की गाठ सफेद कपड़ा केसरिया रंग कर पोटली बाँध दी और आमने सामने सगाई के बोल बोले गये |
डूंगर थे तब दूर थे अब हो गयी पहचान प्रीत लगी प्रेम की निब्ज़े हीरा ख़ान
हीराहीरा क्या कहू हीरा जाग मे धोय एक हिरा समुद्र मे बसे एक सगा के पास 
सगा ने परवाना भेज लिया कस्तूरी साथ तोले तो पूरी उतरे उतरे पूरी जान

बेवाड़ा महाभारत के बोल

माँगे बेटी मिल गयी बिक गयी टके तोल फूला भरी चवाडी तारा भरी रात
रुपया सुपारी हल्दी की गाठ पाँच मिली ने सगाई की पड़ी पहेलो गाँठ
ऋषि की छोरी ने लबाना को छोरो टूटे पेर छूटे नही गाँठ गंगा जमुना बहे 
जनम जोड़ो राखे जय महादेव सुखी करे सगाई कर के मीठा मूह कर सब जाजम से उठ गये

ऋषि ने मंडप बाँध कर आगे लड़की का और पीछे लड़को का खाकरे की हरी लकड़ी से कामठी बाँधी १३ दिन तक मंडप रहे तेरवे दिन ऋषि बोले आज मे विवाह कर दूँगा परंतु ये लबाना कहलाओगे मेरे आश्रम की कन्याओ को कहेगा की ये लबानी हे तुम्हे मेरी पोशाक पहननि पढ़ेगी तब लबाना भाइयो ने कहा हमे मंज़ूर हे तब श्रीगी ऋषि ने कहा की मेरी पोशाक झाल तमणीयो पाठीया नाका वाला कड़ा गला मे कामरांक कोहनी मे बडा वाला कडा माथा पर बोर और चुटलो पठोला कड़ी इतना कहकर विवाह साथ फेरो के साथ सम्पन हुआ सीग़ी ऋषि ने लाल कपड़ो मे नारियल बँधकर भरोसे का नारियल सात फेरो के आगे घुमाया और कन्या दान देकर खुशी से विदाई कर दी गई फिरफिर लोहगाढ़ आकर रहे|
एक दिन शंकर भगवान ने सपना दिया उठकर देखा बारह भाइयो ने बाहर आकर देखा की भगवान शंकर बंजारो के वेश मे आए सवा लाख केशर कस्तूरी भरकर नंदी पेर बैठ हुए बोले घबराओ मत बालको केशर कस्तूरी भरी थैली हे उससे व्यापार करो और अपना जीवन निर्वाह करो दुख पड़े तो मेरा नाम जपना मैं दुख दूर कर दूँगा इतना कहकर भगवान अद्रश्य हो गये लबाना भाई लोहगढ़ छ्चोड़कर व्यापार के लिए निकल पड़े कई वर्ष बाद फिर मथुरा मे निवास किया तो मथुरा से मथुरिया लबाना कहलाए |
मथुरा मे लक्ष्मी माता ने वरदान दिया ली मशरू कपड़ो का ओढाना बिधना करना मथुरा से झंझर नगर  
झाँसी आए लबाना की माता महसुन्दरी चामुंडा की पूजो चैत्रा के माह मे की गयी और साँवली लापसी या दुलिया से पूजन किया गया और मियामाता को बकरे की बलि दी गयी|
झाँसी से अपना लश्कर समान लेकर वॅन्हा से रवाना हुए फिर वो सागर आए सागर मे महादेव का टांडा प्रसाद की उस समय बारहवा भाई सागर न आकर सिंदलपूर मे व्यापार करने लगे वॅन्हा सिन्दु लबाना नाम रखा गया गोत्र के लबाना हे ये सिन्दु लबाना राजस्थान और पंजाब मे निवास करते है तेरहवा गोत्र अगस्त ऋषि के वंशज आलण सिंह लाखन सिंह दिल्ली मे बसे सन् १२३२ मे राणा उदेसिंह के राज्य मे 
हाडा चोहन राजपूत वंश सन् १२३२ मे कोटा बूँदी के राजा राणा करणसिंह हाडा के साथ लबाना जाती चंबल नदी के किनारे भेसोड गढ़ मे शामिल हुए

 १२ भाइयो के नाम 

 धनीरामजी का विवाह सोधष ब्राह्मण काशी प्रसाद की पुत्री कलावती के साथ उनका पुत्रा उदेपालजी गोत्र कश्यप पीलया परिवार

काशीरामजी का विवाह रामप्रकाश जोशी की पुत्री दुर्गावती के साथ उनका पुत्र तेजपाल कुंडल गोत्र बड़दवाल परिवार

राजाराम का विवाह शिवप्रसाद मेहता की पुत्री चंद्रवती के पुत्र हालाणपालजी गोत्र चंद्रावत पड़वाल परिवार 

बंशमत्रम गोपालजी का विवाह जगदीश प्रसाद भट् की पुत्री पार्वती बाई पुत्र करणपाल जी गोत्र भारद्वाज गोजल परिवार

लोकनाथजी का विवाह नन्दप्रसाद दवे की पुत्री शोभावती बाई के पुत्र वीरमपालजी गोत्र अजरावत घोती परिवार  

नंदीरामजी का विवाह गोपी प्रसाद नागर की पुत्री पद्मावती बाई के साथ पुत्र गढ़राजजी गोत्र कसलावत टगरीया परिवार

चंदनजी का विवाह नारायण प्रसाद पाठक की पुत्री पार्वती बाई के साथ पुत्र सॅम्वलदास गोत्र कमाल ऋषि धाणकी परिवार

नंदरामजी का विवाह देवीप्रसादजी पांडे की पुत्री पार्वती बाई के साथ पुत्र गजेपालजी गोत्र केशवदास जी सरताना परिवार

हरीराम जी का विवाह जमनप्रसादजी मिश्रा की पुत्री लक्ष्मीबाई के साथ पुत्र सोनपालजी गोत्र सबसूत बामाण परिवार

परसरामजी का विवाह गंगप्रसाद संचारा की पुत्री चंद्रकान्ता के साथ पुत्र जेसभाणजी गोत्र बच्छ खुमाणा परिवार

श्यामलालजी का विवाह श्री भानुप्रसाद श्रीमाली पुत्री ममलावली के साथ पुत्र सिंधपालजी गोत्र घुम्मर ऋषि कंकर परिवार

सिन्दुप्रसाद का विवाह हरिप्रसाद श्री वास्तव की पुत्री राधबाई के साथ पुत्र रघुविशु गोत्र अगस्त ऋषि सिंधु परिवार


पीलया परिवार

उड़ेपाल जी के पुत्र पातमाजी से पीलया राव उपजाति बनी और झांझर नगर के समीप छावनी मे रहे छावनी मे हरिप्रसाद के पुत्र लखाजी के पुत्र हरिप्रसाद से लपसिया पीलया हुए ग्राम छावनी जिला छायण महिपाल पीलया के पुत्र गंगपाल से गंगासिया हुए ग्राम छापवी जिला छायण कल्याण दासजी के पुत्र मोमाजी से मोगर हुए ग्राम लसाड जिला छायण अरणजी के पुत्र रबड़ीया जी से रबड़ीया हुए ग्राम बरूपाधारी जिला छायण अरणजी के पुत्र उदयपाल जी से खतेडिया हुए ग्राम बरूपाधारी जिला छायण दलपतजी के पुत्र खवडका जी से खेर हुए ग्राम हर्चेंडी जिला छायण प्रथवीराज के पुत्र कनकपाल जी से कछोटिया हुए ग्राम बरूपटा जिला छायण नरसिंह के पुत्र लालासिंह से लील हुए ग्राम सागर जिला छायण गजपाल के पुत्र खजपाल से खज्जा हुए ग्राम झाँसी जिला छायण सोनपाल के पुत्र चरमोजी से चोरया हुए ग्राम आगर जिला छायण बज्रपाल के पुत्र सखदयाल से सखा हुए ग्राम आगर जिला छायण मनसुख के पुत्र लखाजी से लखा हुए ग्राम आगर् जिला छायण लहडजी के पुत्र ढीकलली से ढीकल  हुए ग्राम उदेला जिला छायण लहडजी के पुत्र ढीकलली से ढीकल  हुए ग्राम उदेला जिला छायण नरपालजी के पुत्र हदाजी से हडकसी हुए ग्राम झाँसी जिला छायण माधूसींग के पुत्र अरणज से अखंडपाल एवम अखंडपाल से अखंड हुए ग्राम चापानेर जिला छायण धीराजी के पुत्र खानडेराव से खंडवासा हुए हीराजी के पुत्र चिकूजी से चील हुए ग्राम लामगरा जिला छायण धर्माजी के पुत्र भीलली से भतलिया हुए ग्राम भेसोगढ़ जिला छायण केशोदसजी के पुत्र ढीलोजी से ढील हुए ग्राम भेसोगढ़ जिला छायण केशोदसजी के पुत्र ढीलोजी से ढील हुए ग्राम भेसोगढ़ जिला छायण  नंदलालजी के पुत्र ढगलियाजी से ढंगल जाती बनी ग्राम उदेला की छायण मे भाणजी के पुत्र चंदाजी से चंद्रावत जाती बनी ग्राम भेसोगढ की छायण मे मानाजी के पुत्र खण्डेगोजी से खण्डावत जाती बनी ग्राम उदेला की छायण मे भेरोदस के पुत्र फुरसाजी से फुरसावत जाती बनी ग्राम भेसोगढ की छायण मे तुक्देव के पुत्र खसराजी से खरसावत जाती बनी ग्राम लावण पर्माजी के पुत्र मीठीयाजी से मियावत जाती बनी ग्राम लूणदा गरधरजी के पुत्र धीयाजी से धीयावत जाती बनी ग्राम गोसूणदा रणजीत के पुत्र धंगाजी से धनगा जाती बनी ग्राम झाँसी    


बड़दवाल परिवार

तेजपालजी के पुत्र बिरमपाल से बड़दवाल जाती बनी ग्राम झांझर नगर  मेगराज के पुत्र मोमरजी से मेरावत जाती बनी ग्राम झाँसी दोलतराव के पुत्र सित्ोड़ाजी से हाडी जाती बनी ग्राम तराशा कलमसिंह के पुत्र दिता से दातला जाती बनी ग्राम लामगरा मधुदसजी के पुत्र बिरजी से बसी जाती बनी ग्राम झाँसी सोनपलजी के पुत्र हगाजी से हगावणिया जाती बनी ग्राम झाँसी केवलजी के जुणाजी धीयाजी से जणसा जाती बनी ग्राम सागर जादकरण के पुत्र भोजराम से भरपोडा जाती बनी ग्राम झाँसी हरपालजी के पुत्र सिहोजि से सेर जाती बनी ग्राम झाँसी भारमलजी के पुत्र खंडशसिंह से खच्चर जाती बनी ग्राम सागर मानसिंह के पुत्र  टगलाजी से टगावट जाती बनी ग्राम आगर अदरसिंगजी से पुत्र देदाजी से दोड़ा जाती हुई ग्राम सागर ममेपालजी के पुत्र अजेपाल से अजेडीया जाती हुई ग्राम दतीया  बालाजी के पुत्र  सिंगाजी से सिंग़ाज़ी जाती बनी ग्राम कनेरी रणमल से पुत्र नरसोजी से नेजावत जाती हुई ग्राम कनेरी लखाजी के पुत्र मंगाजी से मॅंगरोज जाती हुई ग्राम आगर
वीरभाण से रोडो से रोडावत जाती हुई ग्राम बणखाली धनाजी के पुत्र बागाजी से बाणावत जाती हुई ग्राम बाणजली गुमानजी के पुत्र गलकाजी से गलई जाती हुई ग्राम लाममरा धन्नाजी के पुत्र किशणजी से किसनवात जाती हुई ग्राम धेखावाडा हाँसाजी के पुत्र दोला से दोलावत जाती हुई ग्राम लामगढ़                      


पड़वाल परिवार

हालणपाल के पुत्र पड़ राज से पड़वाल हुए ग्राम दतिया की छायण मे हाजा के पुत्र लोयाजी से लोहिया हुए ग्राम झाँसी चूड़ाजी के पुत्र राजमल से दशोरिया हुए ग्राम झाँसी मधुरदासजी के पुत्र चंपतराव से चौरमार हुए ग्राम दतिया बेरीसाल के पुत्र पाचाजी से पचोरिया हुए ग्राम हंसबछि अंगजीत के पुत्र खंडजी से खंडारिया जाति ग्राम मूंदडी सोहजी के पुत्र खडगोजी से खंडयत जाति ग्राम हंसबंदी

घोती परिवार

बीरमपाल के पुत्र घीतमल से घोती हुए ग्राम झाँसी कुम्भा के पुत्र बरछवाजी से बरेडिया जाती ग्राम रणहजावर मानसिंह के पुत्र बहुजी से बठठा जाती ग्राम सीमाड़ा श्रीपाल के पुत्र बेरमारजी से बरियावत ग्राम आगर आसा के पुत्र तितवाल से तितरिया जाती ग्राम हसबंदी

गोजल परिवार

करणपालजी के पुत्र गजपाल से गोजल जाती ग्राम झाँसी उदेपालजी के पुत्र कुम्भा से कुशावत ग्राम सोमरगढ़ भाना के पुत्र पूरणसा से पंचमुंडा जाती ग्राम आगर झुझार के पुत्र केशोजी से केसरावत ग्राम पठार गजसिंह के पुत्र ढील से ढील जाती ग्राम पठार कानाजी के पुत्र भीमजी से भोंकण ग्राम सागर करणपालजी के पुत्र पाँचोजी से पचोरिया जाती ग्राम चापनेर  सील के पुत्र धीरसींह से धीरबंसी ग्राम चापनेर बाजेसिंह के पुत्र अगतसिंह से अलावत जाती ग्राम चापनेर बजेसिंहजी के पुत्र ग़ज़ा से गहरा जाती ग्राम चापनेर जलवा के पुत्र मच्छराज से मच्छालिया जाती ग्राम झाँसी रावरतनसिंह के पुत्र बीभाजी से बोहरा जाती ग्राम बरुपठारी गॅजिया के पुत्र भथरावत से भथरावत जाती ग्राम बरुपठारी  


टगरिया परिवार

गढ़राज के पुत्र तकतपाल से टगरिया जाती ग्राम झाँसी हाजा के पुत्र डुग़ाज़ी से डांगर जाती ग्राम झाँसी लकधीर के पुत्र माहवाजी से माली जाती ग्राम बरुपढारी हरपाल के पुत्र लखाजी से लिखडीया जाती ग्राम झाँसी मुकन्सिन्ह के पुत्र महुका से मढावत जाती ग्राम रणतभंवर


धाणकी परिवार

संबलदास के पुत्र धाणजी से धाणकी जाती ग्राम झाँसी केसाजी के पुत्र सलियाजी से सलिया जाती ग्राम हरचंडी भलजी के पुत्र मलचन्दजी से मलिया जाती ग्राम हरचन्डी

सरताणा परिवार

गजेपालजी के पुत्र सोनपाल से सरताणा जाती ग्राम झांझरनगर का खेड़ा तुरंगजी से तूरी जाती ग्राम आगर

बामण परिवार

सोनपाल के पुत्र बीरमपाल से बामण जाती ग्राम झाँसी गजेपाल के पुत्र बरसाल से बांगडिया हुए ग्राम सागर लकधीर के पुत्र तगताजी से तगावत जाति हुई ग्राम आगर पाला के पुत्र कलोजी से कलावत हुए हरपाल के राज से रजावत हुए

खुमाणा परिवार

जेतभाण के पुत्र खुमाजी से खुमाणा हुए ग्राम झाँसी उदेपालजी के पुत्र मजपाल से मज्जा जाति हुई ग्राम साजनपूर साहूजी के पुत्र बॅटूआ से बटवाडा हुए ग्राम रणतभंवर अनिपाल के पुत्र खुशपाल से खसारिया जाति ग्राम सींगोदा

कंकर परिवार

सिंधपाल के पुत्र कनकपाल से कंकर हुए ग्राम दतिया की छायण 

सिंधु परिवार

बारह्वा राव सिंधु